kitna khana chahiye 100 साल व् लम्बी आयु जीने के लिए कितना खाना खाना चाहिए How much food to eat to live to be 100 years old

खाने के प्रति समाज की धरना :–  


समाज में अब ये धारणा फैली हुई है की अधिक खाना खाने से इन्शान अधिक ताक़तवर होता है और अधिक शक्ति मिलती है ऐसा आज कल के लोग सोचते है और खूब छक कर खाना खाते है बल्कि ऐसा भी सुनने को मिलता है 



की हम तो कमाते ही खाने के लिए है 

खायगे नहीं तो जियेंगे कैसे 

जो खा लिया वो अपना 

लोगो की सोच कुछ इस प्रकार है वो मानते है की कम खाने से इन्शान कमजोर हो जाता है एक हमने इस पोस्ट में भी लिखा था ये है वो पोस्ट आपने  होगी अति न करे किसी भी कार्य में हो सके तो पढ़ लेना इसको भी  

पहले भी और  आज भी अनुसंधान करने पर ज्ञात हुवा की सुखी और लम्बी आयु उसी ने पायी है जिसने कम भोजन किया हो कम खाने से खाना आसानी से पच जाता है बिना भूख या अधिक खाने से खाना आहार पच नहीं पता है क्योकि पाचन प्रणाली अथवा आंतो में पड़ा हुवा खाना सड़ता ही है और अधिक खाना खाने से पाकस्थली की संकोचन तथा प्रसारण छमता कमजोर हो जाती है और बवासीर जैसी बीमारी भी जन्म ले लेती है 


अधिक भोजन एवं खाना खाने से अजीर्ण अथवा खट्टी डकार हार्ट अटेक आट्रिज ब्लॉकिंग बालो का झगड़ना  सुगर कैंसर अस्थिवात मूत्र ग्रंथि का रोग तथा हाई ब्लडप्रेशर आदि बीमारिया अधिक खाना खाने से ही होती है 
अति भोजन रोगमूलम 




                                  अधिक खाना बीमारी की जड़ है 


आजकल देखा जाये तो इन्शान जीने के लिए नहीं बल्कि खाने के लिए जी रहे है और अधिक खाना खाने की धुन और लत में लेगा रहता है और मनुष्य की पाचन शक्ति से अधिक खाना खाना इन्शान के लिए जहर से कम नहीं है इसी के साथ साथ संतुलित मात्रा में खाया हुवा खाना अमृत है और अधिक खाया हुवा खाना अकाल मृत्यु का कारण भी बन जाता है ज्यादा खाना खाने से जीवन शक्ति पर अधिक बोझ पड़ता है भोजन को पचाने पाचक रस बनाने की कोशिकाओं की  टूट फुट की मरम्मत करने शरीर को पोषण देने और विषेशकर मल निष्कासन के अंगो पर जीवनी जीवनी शक्ति को ज्यादा व्यय करने से रोगपत्ति तथा इन्द्रिया कमजोर हो जाती है और अधिक भोजन आंतो में सड़ने से पुरे शरीर को विषैला लार  देता है लेकिन संतुलित भोजन से जीवनी शक्ति  सुचारु रूप से अपना  अपना कार्य करती रहती है और इंसान सुख के साथ लम्बी आयु का आन्नद ले सकता है 






अधिक भोजन के फलस्वरूप अनेक वैज्ञानिको ने अपने अपने मत दिए है आप भी जानिए किसने क्या कहा 


मेकफेडेन के अनुसार :-  
आजकल लोग जितनी मात्रा में खाना खाने के आदि हो गए है उसका एक चौथाई मात्रा से ही उनका काम आराम से और सफलता पूर्ववक चल सकता है आवश्यकता  से अधिक खाना खान से लोग अनेक बीमारियों के शिकार होकर समय से पहले ही मरते जा रहे है 


उदाहरण :-  पहलवान खूब अधिक खाना खता है और उसको कशरत अथवा व्यायाम के माध्यम से उसको पचा भी लेता है लेकिन बाद में अनेक रोगो से घिर कर कम उम्र में ही मृत्यु हो जाती है क्योकि आगे चलकर उसकी जीवनी शक्ति मंद गति से काम करने लगती है 

नेपोलियन :-  कम खाने वालो की अपेक्षा ज्यादा खाना खाने वालो की मृत्यु अधिक हुई है 


डा. लिंडलहार :-  जो हम खाते है उसका सिर्फ तिहाई हिस्सा हमारे शरीर को पलता है और बचा हुवा दो तिहाई डॉक्टरों को पालता है 

बर्नर मैकफ़ेडन :-  के अनुशार कम भोजन दिन में दो बार करने से स्वाथ्य और कार्यकुशलता में उन्नति होती है 




विशेष सुचना :- 

 भोजन स्वाद के लिए ठूस ठूस क्र खाना बहुत ही नुकशान दायक है अपनी पाचन शक्ति और जरूरत को देखकर ही भोजन खाना चाहिए पाचन शक्ति से अधिक खाना ज़हर के बराबर है संतुलित और कम भोजन कहने से ही हमारे ऋषि मुनि तथा प्लेटो ,सिसरो ,सुकरात ,वीनस के लूगी कार नारो ,हंगरी देश का पिट्स अमेरिका के फ्रेडरिक शहर का मेलेटो यार्क शायर का हेनरी जेनकिश आदि निरोगी और लम्बी आयु प्राप्त कर चुके है 



GOOD  LUCK  


 



 

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